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Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)

कबीर दोहावली

मूल श्लोकः

दीठा है तो कस कहूं, कह्या न को पतियाइ। हरि जैसा है तैसा रहै, तू हरिष हरिष गुण गाइ॥

Kabir 8.2

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Translations & commentaries(3)

Sūtra Translation

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यदि उस परमात्मा के दर्शन भी हो गए हो तो भी उस अवर्णनीय का वर्णन कैसे किया जा सकता है और यदि किसी प्रकार वर्णन भी कर दिया जाय तो कहने पर विश्वास कौन मान सकता है। परमात्मा जिस प्रकार का है उसे उसी प्रकार का रहने दो हे मन! तू प्रसन्नतापूर्वक उस परमात्मा के गुणों का स्मरण कर।

Bhāṣya Commentary

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ईश्वर के अस्तित्व का बखान कठिन है। उसका स्मरण ही करना चाहिए। ​

Padārtha Word-meaning

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पतियाह = विश्वास करता है।