यदि उस परमात्मा को भारी कहा जाय तो बहुत डर लगता है क्योकि वह निराकार है फिर भारी कैसे हो सकता है? और यदि हल्का कहूँ तो यह भी असत्य हो है। क्योंकि मैंने अपने भौतिक नेत्रों से परमात्मा को देखा ही नहीं है फिर उनके अस्तित्व के विषय में कह कैसे सकता हूँ।
Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)
कबीर दोहावली
मूल श्लोकः
भारी कहौं त बहु डरौं, हलका कहूँ तो झूठ। मैं का जांणौं राम कू, नैनूँ कपहूँ न दीठ॥
Kabir 8.1
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Translations & commentaries(3)
Sūtra — Translation
Bhāṣya — Commentary
ब्रह्म के स्वरूप का वर्णन नहीं किया जा सकता है।
Padārtha — Word-meaning
दीठ = देखा।