कबीर की आत्मा अन्य सांसारिक आत्माओं से कहती है कि हे सखी! परमात्मा को खोजते खोजते मैं स्वयं खो गई। समुद्र (परमात्मा) बूँद (आत्मा) के अन्तःकरण मे हो व्याप्त है उसको कैसे खोजा जा सकता है।
Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)
कबीर दोहावली
मूल श्लोकः
हेरत हेरत हे सखी, रहया कबीर हिराइ। समंद समाना बूँद मैं, सो कत हेर्या जाइ॥
Kabir 7.4
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Translations & commentaries(3)
Sūtra — Translation
Bhāṣya — Commentary
हृदय स्थित ईश्वर को देखना मुश्किल है।
Padārtha — Word-meaning
समद = समुद्र।