कबीर की आत्मा परमात्मा को खोजते-खोजते उसी में लीन हों गई। आत्मा और परमात्मा का मेल हो गया। जो बूँद समुद्र में जाकर मिल जाती है उसका पता नहीं लगाया जा सकता है उसी प्रकार जिस आत्मा का परमात्मा में समावेश हो गया उसको भी नही खोजा जा सकता है।
Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)
कबीर दोहावली
मूल श्लोकः
हेरत हेरत हे सखी, रह्या कबीर हेराइ। बूँद समानी समद मैं सोकत हेरी जाइ॥
Kabir 7.3
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Translations & commentaries(3)
Sūtra — Translation
Bhāṣya — Commentary
आत्मा का जब परमात्मा से एकीकरण हो जाता है तो उसको ढूँढ़ पाना कठिन होता है।
Padārtha — Word-meaning
हेरत-हेरत = खोजते खोजते। हिराइ = खो जाना। हेरी = पता लगाना।