मन सांसारिक झंझटों से हटकर प्रभु प्रेम रूपी समुद्र में जाकर मिल गया और वहाँ मल-मल कर स्नान करने लगा। हे प्रभु! आप अत्यन्त दयालु हैं बहुत प्रयत्न करने पर भी आपकी वास्तविक थाह नही मिलती है।
Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)
कबीर दोहावली
मूल श्लोकः
मन उलट्या, दरिया मिल्या, लागा मलिमलि न्हांन। थाहत थान न आबई, तूँ पूरा रहिमान॥
Kabir 7.2
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Translations & commentaries(3)
Sūtra — Translation
Bhāṣya — Commentary
जीवात्मा को प्रभु-प्रेम-सागर की थाह नही मिल पाती है।
Padārtha — Word-meaning
रहिमान = दयालु।