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Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)

कबीर दोहावली

मूल श्लोकः

संदर्भ—जीवात्मा प्रभु-भक्ति के रंग में रंगकर जीवन्मुक्त हो जाती है। राम रसाइन प्रेम रस, पीवत अधिक रसाल। कबीर पीवरण दुलभ है, माँगै सीस कलाल॥

Kabir 6.2

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Translations & commentaries(2)

Sūtra Translation

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प्रभु भक्ति का प्रेम रस पीने में बड़ा मधुर होता है और पीते-पीते और अधिक मधुर होता जाता है किन्तु कबीर कहते हैं कि इसकी प्राप्ति की शर्त बड़ी कठिन है क्योंकि गुरु रूपी मदिरा विक्रेता कठिन से कठिन स्थिति का सामना करने के लिए साधक को उपदेश देता है।

Padārtha Word-meaning

Padārthahi.wikisource· HI

कलाल = मदिरा पिलाने वाला।