शिव और शक्ति को किस दिशा में देखा जा सकता है वह सर्वव्यापी है। जो दिशा विशेष में देखने की चेष्टा करेगा उसके पीछे धूल उड़ने लगेगी। आत्मारूपी मछली अनहदनाद के सहारे ब्रह्म में लीन होगी, शिव और शक्ति की अनुभूति करना उतना ही कठिन है जितना मछली का ख़जूर पर चढ़ना अथवा सिंह का जल में प्रवेश करना।
Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)
कबीर दोहावली
मूल श्लोकः
सिबसकती दिसि कौण जु जोवै, पछिम दिसा उठै धूरि। जल मैं स्यंघ जु घर करै, मछली चढ़ै खजूरि॥
Kabir 5.4
Audio
Translations & commentaries(3)
Sūtra — Translation
Bhāṣya — Commentary
अनहद शब्द के सहारे आत्मा ब्रह्म में लीन हो जाती है।
Padārtha — Word-meaning
सकती=शक्ति। स्यंघ=सिंह। मछली=आत्मा।