आकाश में निम्न सुख हुआ है नीचे आत्मारूपी पनिहारी जल जल को प्राप्त करने के लिए आकांक्षी है। इस कुएँ का जल कोई विरली शुद्धता ही ही ग्रहण करती है।
Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)
कबीर दोहावली
मूल श्लोकः
आकासे मुखि औंधा कुवाँ, पाताले पनिहारि। ताका पांणीं को हंसा पीवै, बिरला आदि बिचारि॥
Kabir 5.3
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Translations & commentaries(3)
Sūtra — Translation
Bhāṣya — Commentary
शून्य शिखर गढ़ का सुभग जल हंसात्मा ही पान करती है।
Padārtha — Word-meaning
आकासे = आकाश में ब्रह्म रन्ध्र में। औधा = निम्नाभिमुख। पनिहारि = पनिहारी।