प्रेम पूर्वक ध्यान लगाने से अविगत ब्रह्म को अनुभूति होती है। अनहृदनाद प्रतिश्रुति होता है और अनहद का झरना बहने लगता है।
Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)
कबीर दोहावली
मूल श्लोकः
अनहद बाजै नीझर झरै, उपजै ब्रह्म गियान। आबगति अंतरि प्रगटै लागै प्रेम धियान॥
Kabir 5.2
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Translations & commentaries(3)
Sūtra — Translation
Bhāṣya — Commentary
प्रेम पूर्वक ध्यान लगाने से ब्रह्म प्रकट होता है।
Padārtha — Word-meaning
नीझर = निर्झर। गियान = ग्यान। आवगति = अनिर्वचनीय।