जब से निर्मल सूर्य रूपी ब्रह्म का प्रकाश प्राप्त हुआ तब से हृदय कमल प्रकाशित हो गया। समस्त वासनाओं का अन्धकार मिट गया और अनहद नाद की तुरही बजने लगी।
Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)
कबीर दोहावली
मूल श्लोकः
कबीर कवल प्रकासिया, ऊग्या निर्मल सूर। निस अंधियारी मिटि गई, बागे अनहद नूर॥
Kabir 5.1
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Translations & commentaries(3)
Sūtra — Translation
Bhāṣya — Commentary
ज्ञान के उदय होते ही हृदय कमल विकसित हो गया।
Padārtha — Word-meaning
ऊग्या = उदित हुआ।