विरह चुरा है,ऐसा मत कहो। विरह शरीर का सुलतान है। जिस शरीर मे विरह की गति नही है,वह शरीर स्मशान सहश है।
Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)
कबीर दोहावली
मूल श्लोकः
प्रसंग— विरह की चोट एव पीड़ा से विरही का समस्त शरीर जंजर हो रहा है। जिहि सरि मारि काल्हि, सो सर मेरे मन समझा। तिहि सरि मारि ,सरबिन सचपाँऊ नहीं ॥
Kabir 3.9
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Translations & commentaries(3)
Sūtra — Translation
Bhāṣya — Commentary
विरहा शरीर का सुल्तान है।
Padārtha — Word-meaning
वुरहा =चुरा है। जिन-मत-। सुलितान = सुलतान=सम्राट। घटि=घट-शरीर। मसान=श्मशान-मरघट।