सतगुरु ने जब खीच कर शब्द बाण मुझे मारा तो मै ज्ञान से सम्पन्न हो गया। शब्द बाण के फल स्वरुप मर्म अहत् हो गया और कलेजा पीड़ा अभीभूत हो गया।
Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)
कबीर दोहावली
मूल श्लोकः
प्रसंग प्रेम एवं विरह की पीड़ा ने पिंजर या शरीर एवं ममं को अभिभूत कर रखा है। चोट सताँणी विरह की,सब तन जर जर होइ । मारणहारा जाँणि है, कै जिहि लागी सोइ ॥
Kabir 3.8
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Translations & commentaries(2)
Sūtra — Translation
Padārtha — Word-meaning
मै= मुझे। जांणि = जाण=जान। मरम्म= मर्म = अभिभूत।