हे राम! विरहिनी तुम्हारे दर्शन के लिए उठते हैं और पुनः गिर पड़ती है। यदि मृत्यु के अनन्तर तुम्हारे दर्शन हुए भी तो किस काम के उससे क्या लाभ होगा।
Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)
कबीर दोहावली
मूल श्लोकः
बिरहिन ऊठै भी पडै, दरसन कारनि राम। मृवां पीछे देहुगे सो दरसन किहि काम॥
Kabir 3.5
Audio
Translations & commentaries(3)
Sūtra — Translation
Bhāṣya — Commentary
प्रस्तुत साखी में विरहिनी की कृशावस्था, और विरह के दुषप्रभाव का चित्रण किये गये हैं।
Padārtha — Word-meaning
ऊठै= उठे । भि= फिर । पडै= गिर= गिर पडती है । दरसद=दर्शन। कारनि = कारणी।