कबीर दास कहते हैं कि समस्त संसार खाता है, पीता है, सोता है और सुख पूर्वक जीवनयापन करता है। केवल मैं दुःखी हूँ और रोता हूँ।
Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)
कबीर दोहावली
मूल श्लोकः
सुखिया सब संसार है, खावै अरू सोवै। दुखिया दास कबीर है, जागै अरू रोवै॥
Kabir 3.29
Audio
Translations & commentaries(3)
Sūtra — Translation
Bhāṣya — Commentary
चेतन प्राणी संसार को गति देखकर दुःखी रहता है।
Padārtha — Word-meaning
खावै = खात है। सोवे = सोता है। रोवै = रोता है।