हे कृश चक्रवाक। रात्रि ने तुझे प्रिय से वियुक्त कर दिये हैं। तू घर-घर चीत्कार करता फिरा। सूर्य के उदय होते ही पुनः प्रिय से समागम होगा।
Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)
कबीर दोहावली
मूल श्लोकः
रैणा दूर विछोहिया, रहु रे संषम झूरि। देवलि देवलि धाहुड़ी, देसी ऊगे सूरि॥
Kabir 3.28
Audio
Translations & commentaries(3)
Sūtra — Translation
Bhāṣya — Commentary
हे वियोगी धैर्य धारण कर। सूर्योदय होते ही पुनःप्रिय के दर्शन होंगे।
Padārtha — Word-meaning
रेणा = रैण = रैन = रात्रि। विछोहिया = वियुक्त हुई। सषम = चक्रवाक। झूरि = कृश। देवलि = देवालय = मन्दिर = घर। धाहुड़ी = दहाड़ता = चीत्कार करता। देसी = देगा। ऊगे = उदय। सूरि= सूर्य।