बड़े परिश्रम करने के अनन्तर भव सागर में सतगुरु रूपी जहाज़ मिल गया। अब यदि इसे छोड़ता हूँ तो भवसागर में डूब जाऊँगा और यदि इस जहाज़ को ग्रहण करता हूँ तो उसके शब्द रूप सर्प, भुवग मुझे डस लेंगे।
Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)
कबीर दोहावली
मूल श्लोकः
भेला पाया श्रम सौं, भौसागर के मांहि। जे छाँड़ौं तौ डूबिहौं, गर्हौं त डसिये बाँह॥
Kabir 3.27
Audio
Translations & commentaries(3)
Sūtra — Translation
Bhāṣya — Commentary
इस भव सागर में बड़े श्रम बड़े भाग्य से सतगुरु रूपी जहाज़ मिल गया।
Padārtha — Word-meaning
भेला = वेडा। सौ = से। छाड़ौ = छोडू। गहो = ग्रहण करूँ।