हे प्रिय! ये नेत्र आपकी प्रतीक्षा करते-करते प्रदग्ध हो उठे। न तेरे दर्शन प्राप्त होते हैं न प्रसन्नता प्राप्त होती है। मैं विरह वेदना से पीड़ित हूँ।
Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)
कबीर दोहावली
मूल श्लोकः
नैन हमारे जलि गये, छिन-छिन लोडै तउज्झ। नां तूँ मिलै न मैं खुसी, देसी वेदन भुज्झ॥
Kabir 3.26
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Translations & commentaries(3)
Sūtra — Translation
Bhāṣya — Commentary
प्रिय के दर्शनों के अभाव में प्रतीक्षा रत मेरे नेत्र प्रदग्ध रहे और अपार वेदना से पीड़ित रहा हूँ।
Padārtha — Word-meaning
छिन = क्षण। लोडै = प्रतीक्षा करें। तुज्झ = तुझ। वेदन = वेदना। मुज्झ = मुझे।