अपने रेशमी वस्त्रों को फाड कर फेंक दूँ और कमली धारण कर लूँ। जिस-जिस भैष से हरि मिल सके वही-वही भेष धारण कर लूँ।
Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)
कबीर दोहावली
मूल श्लोकः
फाड़ि पुटोला धज करौं, कामलड़ी पहिराउँ। जिहि जिहि भेषां हरि मिलैं, सोइ-सोइ भेष कराउँ॥
Kabir 3.25
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Translations & commentaries(3)
Sūtra — Translation
Bhāṣya — Commentary
प्रियतम की प्राप्ति के लिए समस्त बलिदान निःसार है।
Padārtha — Word-meaning
पुटोला—पटोरा, रेशमी वस्त्र। धज = धज्जी, टुकड़े-टुकड़े। कामलड़ी = कामली = कामरी = कम्मल। भेषा—भेष में।