प्रियतम की खोज में एक पर्वत से दूसरे पर्वत, दूसरे से तीसरे पर्वत तक अर्थात् स्थान-स्थान पर भटकता रहा और प्रिय के वियोग में रो रोकर नैन खो दिए परन्तु वह तत्व न प्राप्त हुआ जिससे जीवन प्राप्त होता।
Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)
कबीर दोहावली
मूल श्लोकः
परबति परबति मैं फिर्या, नैन गँवाये रोइ। सो बूटी पाँऊँ नहीं, जातै जीबनि होइ॥
Kabir 3.24
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Translations & commentaries(3)
Sūtra — Translation
Bhāṣya — Commentary
विरह के कारण स्थान-स्थान पर भटकता रहा पर विरह को प्रशान्त करने वाला परम तत्व न मिला।
Padārtha — Word-meaning
परवति = पर्वत। फिरया = घूमा, भटका। नैन = नयन—नेक। गँवाये = खोये। जातै = जिससे। जीवनि = जीवन, जीवन शक्ति।