क्रौंच पक्षी ने आकाश में आर्त क्रन्दन किया जिससे आर्द्र होकर घनश्याम ने सरोवरों को जल से ओत-प्रोत कर दिया। परन्तु जो गोविन्द अर्थात् भगवान से विमुख है, उनकी तथा दशा होगी। भगवान से वियुक्त उन प्राणियों पर कौन कृपा भाव प्रदर्शित करेगा।
Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)
कबीर दोहावली
मूल श्लोकः
अंबर कुंजा कुरलियां, गरजि भरे सत्र ताल। जिनि थैं गोविन्द वीछुटे, तिनके कौंण हवाल॥
Kabir 3.2
Audio
Translations & commentaries(3)
Sūtra — Translation
Bhāṣya — Commentary
आकाश क्रौंच पक्षी के आतं क्रन्दन से परिपूरित हो उठा। फलतः जलद का अन्तस आर्द्र हो उठा और उसके रूदन से जलाशय ओत-प्रोत हो उठे। परन्तु जो प्राणी गोविन्द से विमुख हैं, उनके प्रति कौन संवेदनशील होगा।
Padārtha — Word-meaning
अम्बर = आकाश। कुंजा = क्रौंच। गरजि = गर्जन करके। पै = से। वीछुटे = विछुड़े = वियुक्त। कौण = कौन। हवाल = हाल।