प्रतीक्षा करते-करते जीवन बीत गया। विरहणों विरह मे उपलित हे। भावर्थ—कबीर कहते हे कि प्रिय की प्रतिक्षा करते-करते दिन भी गनीत हो गया और राथि भी अतीत हो गई । विरहिरणो प्रिय के वियोग मे अत्यन्त व्यर्ग है ।
Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)
कबीर दोहावली
मूल श्लोकः
कबीर देखत दिन गया,निस भी देखत जाइ। विरहरिग पिव पावे नहीं, जियरा तलपे माइ ॥
Kabir 3.19
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Translations & commentaries(2)
Bhāṣya — Commentary
Padārtha — Word-meaning
देखत = प्रतीक्षा करते। जियरा = जी, प्राण।