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Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)

कबीर दोहावली

मूल श्लोकः

नैनां अतरि आचरूँ, निस दिन निरपौं तोहि । कब हरि दरसन देहुगे, सो दिन आवै मोहि ॥

Kabir 3.18

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Translations & commentaries(2)

Bhāṣya Commentary

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हे प्रभु ! आपको अपने नैनो में बसा लूं,और प्रतिक्षण आपके दर्शन करता रहूँ।। भवार्थ— हे प्रभु । आपको अपने नेत्रो मे बसा लूं; जिसमे मैं आपको प्रतिक्षण देखा करूं। हे हरि !वह दिन कब आएगा,जब आपके दर्शन प्राप्त होगा।

Padārtha Word-meaning

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अतरि= अन्तर मे ।आचरुं=वमा लूं। निरपौ=देखू दरसान=दर्शन । देहुगे=दोगे ।