यहानुभूति हंमो-खेल और माया मे अनुरन रह कर नही होनी हे । कम, क्रोध तथा तृप्णा का महज कर देने ने हो सहानुभूति होनी है।
Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)
कबीर दोहावली
मूल श्लोकः
हाँसी खेलौं हरि मिलै, कारण सहै परसान । काम क्रोध त्रिप्णां तजै,तहि मिलै भगवान ॥
Kabir 3.16
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Translations & commentaries(3)
Sūtra — Translation
Bhāṣya — Commentary
आमोद-प्रमोद तथा माया मे सलग्त रहकर कही व्रहानुभूति होनी है । कम,क्रोध तथा तृप्णा का परित्याग करने से ही प्रिय के माव तादात्य नहना पिता होता है।
Padārtha — Word-meaning
हानी==हानि धेन मे । पोगा = स्पैन । पर=प्रवर=तेन । मान=धान, तेज धार ।