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Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)

कबीर दोहावली

मूल श्लोकः

संदर्भ— आँसु आँसु मे भेद है । वही सच्चे आँसू है जो हृदय से प्रस्फुटित होते हैं । कबीर हसणां दूरि करि, करि रोवण सै चित्त । बिन रोयां क्यूँ पाइए, प्रेम पीयारा मित्त ॥

Kabir 3.14

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Translations & commentaries(3)

Sūtra Translation

Sūtrahi.wikisource· HI

यदि प्रिय के विरह मे रोता है तो वल घटता हे वक्ति क्षोण होती है हंसता हूँ लोकिक आनन्दो मे संलग्न होता हूँ तो प्रिय राम से दूर होना है अत: प्रिय का ध्यान मन ही मन , विरहानुभूति अंतस मे होनी चाहिए । प्रकटिन होने के लिए अवकाश नही है। य या धुन अंदर ही अन्दर काष्ठ को खा जाता हे उसी प्रकार विरहाग्नि अदर ही अदर प्रदग्ध रहे ।

Bhāṣya Commentary

Bhāṣyahi.wikisource· HI

विरह की तीव्रता अन्दर ही अन्दर प्रदग्ध रहे ।

Padārtha Word-meaning

Padārthahi.wikisource· HI

घटै=घटे=अल्प हो । हसौ=हसू । रिमाइ= नाराज हो माहि=मे । विसूरर्णा =स्मरण करना । घुण=घुन ।