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Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)

कबीर दोहावली

मूल श्लोकः

आपडिंयां प्रेम कसाइयां, लोग जांरगौ दुखडि़याँ । साँईं अपणै, कारणौ, रोइ रोइ रतडि़याँ ॥

Kabir 3.12

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Translations & commentaries(3)

Sūtra Translation

Sūtrahi.wikisource· HI

नेत्र प्रेम-विरहाग्नि मे सतप्त होने के कारण लाल हो गए । स्वामी के वियोग के कारण रो रोकर लाल हो गए हैं और लोग जानते हैँ नेत्र दुख रहे हैं ।

Bhāṣya Commentary

Bhāṣyahi.wikisource· HI

प्रिय के वियोग मे रूदन करते करते नेत्र आरक्त हो गए हैं ।

Padārtha Word-meaning

Padārthahi.wikisource· HI

अपडिया = अंखडिग्रा = आँखें । कसाइया = कसी गई है । दुखाइयाँ = दुख रही है । रतडियाँ = लाल हो गई है ।