प्रिय के वियोग मे नेत्रो से आँसू-निर्भर दिनरात प्रवाहित रह्ते है और प्राण पपीहे के सदृश प्रिय का नाम रटते हैं । हे प्रिय कत्ब मिलोगे । शब्दार्य—नीझर =निझर= झरना । रहट = कुआं जल निकालने का यंत्र । निसजाम= निशयाम । कवरु = अरे कब ।
Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)
कबीर दोहावली
मूल श्लोकः
नैनां नीझर लाइया,रहट बहै निस जाम। पपीहा ज्यूँ पिव पिव करौं,कबरु मिलहुगे राम ॥
Kabir 3.11
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Translations & commentaries(2)
Sūtra — Translation
Bhāṣya — Commentary
विरह के काररग नेत्रो से अश्र निरतर प्रवाहित रहते है ओर प्रारग पपीहे के सहश प्रिय का नाम रटते रहते है।