चिरहिणी कहती है कि इन तन को पोरक चना ढानूं अौर उनके प्रारगा की पतिवा टालपर रऊ नेन मे निपित करते हुए,प्रिय का मुख देखने के लिए मै फिर प्रतीक्षित रहुंगी।
Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)
कबीर दोहावली
मूल श्लोकः
इस तन का दीवा करौ,वाती मेल्यूँ जीव। लोही सीचौं तेल ज्यूँ,कब मुख देखौ पीव ॥
Kabir 3.10
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Translations & commentaries(3)
Sūtra — Translation
Bhāṣya — Commentary
विरहिरगी चिर काल तक प्रतोक्षा मे अनुरक्त रहना पाहनो है। शरीर रुपो दीपक में प्राणों की वतिका सुरक्षित रख कर यह प्रिय के दर्द को आलोकित करना चाहती है।
Padārtha — Word-meaning
दोवा=दीपक। पगेँ=पमं। बातए=वती। गल्यूं= टाउं सोहो=स्न=रण। सीणो=मिणिल परं।