Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)
कबीर दोहावली
मूल श्लोकः
भौ सागर की त्रास तेक, गुरु की पकड़ो बाँहि । गुरु बिन कौन उबारसी, भौ जल धारा माँहि ॥
Kabir 22.58
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कबीर दोहावली
मूल श्लोकः
भौ सागर की त्रास तेक, गुरु की पकड़ो बाँहि । गुरु बिन कौन उबारसी, भौ जल धारा माँहि ॥
Kabir 22.58
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