Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)
कबीर दोहावली
मूल श्लोकः
गुरु सों प्रीति निबाहिये, जेहि तत निबटै सन्त । प्रेम बिना ढिग दूर है, प्रेम निकट गुरु कन्त ॥
Kabir 22.42
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कबीर दोहावली
मूल श्लोकः
गुरु सों प्रीति निबाहिये, जेहि तत निबटै सन्त । प्रेम बिना ढिग दूर है, प्रेम निकट गुरु कन्त ॥
Kabir 22.42
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