तीनो लोको मे राम नाम सार तत्व है । जब से कबीरदास ने उसे अपने मस्तक पर धारण किया है , तब से अपार शोभा से युक्त हो गया। विशेष—प्रस्तुत साखी मे कबीर ने राम नाम की दो विशेष्ताओ का उल्लेख किया है । प्रथम , राम नाम तत्व और सार है । द्वितीय वह तिलक के रुप मे मस्तक् पर धारण करने से व्यक्तित्व की शोभा अभिवृद्ध हो जाती है ।
Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)
कबीर दोहावली
मूल श्लोकः
जन फबीर मस्तक दिया, सोभा अधिक अपार ॥
Kabir 2.3
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Translations & commentaries(3)
Sūtra — Translation
Bhāṣya — Commentary
संसार मे राम नाम समस्त साधना का तत्व है । बारम्बार कबीर ने इसी भाव पर बल दिया है । जीवन और व्यक्तित्व नाम के सम्पर्क से और भी अधिक सुशोभित हो गया ।
Padārtha — Word-meaning
तिहुं = तीनो । मैं = मे । नाव = नाम । सोभा = शोभा ।