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Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)

कबीर दोहावली

मूल श्लोकः

कबीर चित चमॅकिया,घहॅ ढिसी नागी लाइ । हाथु घडा,वेग लेहु वुक्ताई ॥

Kabir 2.20

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Translations & commentaries(3)

Sūtra Translation

Sūtrahi.wikisource· HI

कबीर कहते है कि माया(या वनाना या तृष्णा)वो अग्नि हरिरम की दुआ हओ।हमसे द्वार भगवान को पूजा-पिट करना हो । विशेष-(१)भग्वन् को प्रसाद् करने के लिये अछि काम करना पडता है । उस के लिए अछि परिवार ने हम को सहायता देती है। ​जीवन में घटित करने का प्रयत्न किया है वासनाओं और माया द्वारा प्रदग्ध अग्नि को नाम सुमिरण के जल के द्वारा ही प्रशान्त किया जा सकता है कबीर ने यहाँ पर अत्यन्त सुलभ उक्ति के द्वारा आध्यात्मिक जगत के भाव को प्रभावशाली बनने की चेष्ठा की है। (२) कबीर...लाइ से तात्पर्य है कि वासना की अग्नि चारों दिशाओं, सर्वत्र लगी है और उसके प्रभाव से मन चमत्कृत हो उठा है संसार के सर्वत्र माया की अग्नि प्रज्वलित है। और मन उसमें रमा हुआ था अत्त्यन्त अनुरक्त है। (३) वेगे लेहु बुझाइ-शीघ्र ही इस अग्नि बुझा लो। कबीर ने यहाँ वेगे शब्द का प्रयोग किया है। क्षणभङ्गुर जीवन किसी पल विनष्ट हो सकता हैं। अतः मानव के लिए यह आवश्यक है कि अत्यन्त शीघ्रता के साथ जीवन की बिगड़े क्रम में सुधार के करले। (४) हरि...घड़ा से तात्पर्य है कि हरि नाम रूपी जल का घड़ा हाथ में है।

Bhāṣya Commentary

Bhāṣyahi.wikisource· HI

वासना तृणा और माया की अग्नि या दाह ने मन की एकाग्रता को विनिष्ट कर दिए है यह दाह,सताप या पीटा तभि विनष्ट हो जाती है जब हरिनाम पीतल जल को ग्रहण करके उसे फरने को चेष्टा मे मानव अनुभात्न और दतघित हो ।

Padārtha Word-meaning

Padārthahi.wikisource· HI

चमकिया = चमत्कृत। चहुँ = चारों। दिसि = दिशा। लाइ = ज्वाला, अग्नि। हाथू = हाथों में। वेगे = शीघ्र ही। लेहु = लो। बुझाइ बुझा।