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Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)

कबीर दोहावली

मूल श्लोकः

पहली बुरा कमाइ करि,बाँधी विष की पोट । कोटि करम पेलै पलक मैं (जय) आया हरि ओट॥

Kabir 2.15

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Translations & commentaries(3)

Sūtra Translation

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पहले बुरे कर्मो को अर्जित करके विष की पोटली बांधो। हरि की शरण मे आते ही कोटिशः दुष्कर्म पल मे क्षीण हो गाए। विशेष—(१)कबीर ने प्रस्तुत साखी मे अत्यन्त तर्कपूर्ण ढंग से, अभिनव शैली मे कर्म सिध्दान्त का प्रतिपादन किया है। मानव दुष्कर्मो के प्रभाव से विनाश कि पथ पर अग्रसर होकर माया का चेरा बन जाता है। परन्तु हरि की शरण मे जाने पर दुष्कर्मो के प्रभाव से विलमित्रत हो जाते हैं।(२) कबीर ने कर्म के सिद्धान्तों का प्रतिपादन करते हुए उसकी औषधि हरिनाम की ओर सकेत किया है। पूर्वज के साथ ही यहाँ कर्म सिद्धान्तों का प्रतिपादन किया गया है।

Bhāṣya Commentary

Bhāṣyahi.wikisource· HI

कबीर का कर्मवाद तथा पुनर्जन्म मे दृढ़ विश्वास है । कर्म का प्रतिफल मानव को उपभोग करना ही पड़ता है। दुष्कर्मो के दुष्प्रभाव का उन्मूलन करने के लिऐ हरि की शरण मे जाना ही अपेक्षित हरि की शरण मे भव की एक भी बाधा नही रह जाती है। प्रस्तुत साखी मे कवि ने इसी भाव को रोचक शैली मे व्यक्त किया है।

Padārtha Word-meaning

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कमाइ=कमाकर। करि=कर। वाधो=संग्रह की। पोट=पोटली। करम=कर्म। पेलै=फेके, दूर करे। ओट=शरण।