Sant Seva ParishadSant Seva ParishadSSP · sant seva

Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)

कबीर दोहावली

मूल श्लोकः

कबीर सूता क्या करैं, सूताँ होइ अकाज। ब्रह्मा का आसण खिस्या, सुण्त काल की गाज॥

Kabir 2.12

Audio
Translations & commentaries(3)

Sūtra Translation

Sūtrahi.wikisource· HI

कबीर कहते हैं कि हे प्राणी। तू सोता हुआ क्या कर रहा है। सोते रहने से बड़ा अहित होता है। काल की गर्जना सुनकर ब्रह्मा का आसन विचलित हो गया। विशेष—प्रस्तुत साखी में कवि ने काल को प्रबलता और मानव की निष्क्रियता का उल्लेख बड़ी सहज शैली में किया है। (२) मानव काल की प्रबलता से परिचित होने पर भी ब्रह्मनाथ की साधन से विमुख रहता है और अज्ञान निशा में सुषुप्त रहता है। (३) इसीलिए कवि ने पीछे कहा है कि "भगति भजन हरि नाँव है, दूजा दुःख अपार। (४) प्रस्तुत साखी में कवि ने नाम महिमा के साथ ही साथ काल की प्रबलता तथा मृत्यु की अनिवार्य स्थिति का उल्लेख किया है।

Bhāṣya Commentary

Bhāṣyahi.wikisource· HI

काल का नाम सुनते ही जगत नियंता ब्रह्मा तक विचलित हो उठे इतना जानते रहने पर भी मानव ब्रह्म की आराधना से विमुख होकर भी अज्ञान निद्रा में गाफिल पड़ा रहता है।

Padārtha Word-meaning

Padārthahi.wikisource· HI

सुता = सुप्त। अकाज = अहित। आसण = आसन। खिस्या = खिसका, सरका। सुणत = सुनत, सुनते हो। गाज = गर्जन।