Sant Seva ParishadSant Seva ParishadSSP · sant seva

Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)

कबीर दोहावली

मूल श्लोकः

कबीर सूता क्या करै, उठि न रोवै दुक्ख । जाका बासा गोर मैं, सो क्यू सौवै सुक्ख ॥

Kabir 2.10

Audio
Translations & commentaries(3)

Sūtra Translation

Sūtrahi.wikisource· HI

कबीर दास कहते है कि हे प्राणी ! तू अज्ञान निशा मे पड़ा हुआ क्यो सो रहा है । तू उठकर अपने प्रिय के वियोग मे जो दु:ख का अनुभव हो रहा है उसके प्रति क्यो नहि खेद प्रकट करता। जिसका निवास स्थान कब्र है, वह सुख पूर्वक कैसे सोता है। विशेष — विगत साखी मे कबीर ने कहा है 'जाकि मग तै बीछुडया ताही कि संग लागि।' प्रियतम से वियुक्त मानव को अपने दु:खो के प्रति खेद प्रकट करना चाहिए। प्रियतम से वियोग होने का दु:ख सर्वत: महान विपत्ति है। परन्तु मानव उस दु:ख को भूलकर माया के आवरण मे अनुरुक्त रहता है। लोभ की मिठाई के पाते ही वह अपने आप को भूल जाता है। कबीर इस प्रकार मे अज्ञान निशा मे आत्म विस्मृत प्राणियो को संचेत करते हुए कर्तव्य पूर्ति की ओर उनमुक्त रहने का उपदेश दिया है। (२) 'जाका ॱॱॱ सुक्ख' से कबीर का तात्पर्य है कि जो मरण्शील है, जिसका निवास स्थान कब्र है। वह सुख पूर्वक कही पर भी हो सकता है।

Bhāṣya Commentary

Bhāṣyahi.wikisource· HI

नाम जप से विमुख प्राणी को सचेत करते हुए कवि ने विगन साखी मे कहा है कि ' कबीर सूता क्या करै काहे न देखै जागि' तथा ' कबीर सूना क्या करै जागि न जापै मुरारि । ' परन्तु यहा पर कवि ने कहा है ' उठि न रोवै दुक्ख । ' जिसका कदम कब्र मे रखा है, वह सुख से कैसै सो सकता है।

Padārtha Word-meaning

Padārthahi.wikisource· HI

वासा = निवास स्थान । गोर = कब्र । नै = ने । क्यूं = क्यो ।