Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)
कबीर दोहावली
मूल श्लोकः
जाके जिव्या बन्धन नहीं, ह्र्दय में नहीं साँच । वाके संग न लागिये, खाले वटिया काँच ॥
Kabir 18.48
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कबीर दोहावली
मूल श्लोकः
जाके जिव्या बन्धन नहीं, ह्र्दय में नहीं साँच । वाके संग न लागिये, खाले वटिया काँच ॥
Kabir 18.48
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