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Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)

कबीर दोहावली

मूल श्लोकः

कबीर मारग अगम है, सब मुनिजन बैठे थाकि। तहाँ कबीरा चलिगया, गहि सतगुर की सांषि॥

Kabir 14.9

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Translations & commentaries(3)

Sūtra Translation

Sūtrahi.wikisource· HI

―कबीर दास जी कहते हैं कि ब्रह्म-प्राप्ति तक का मार्ग अत्यन्त कठिन है, साधक मुनि भी वहाँ की दुर्गंमता के कारण थक कर बैठ गये हैं जाने की आशा छोड बैठे हैं। ऐसे दुर्गम स्थान पर भी कबीर दास जी सतगुरु के उपदेशो को ग्रहण करके पहुँच गये हैं।

Bhāṣya Commentary

Bhāṣyahi.wikisource· HI

―सतगुरु के उपदेश को ग्रहण करके हो साधक ब्रह्म तक पहुँच सकता है।

Padārtha Word-meaning

Padārthahi.wikisource· HI

―साषि=सीख, उपदेश।