―कबीर दास जी कहते हैं कि जिस शून्य स्थल पर चीटी तक नही चढ सकतो और राई भी नहीं ठहर सकती मन और पवन को जहाँ तक गति नही है उस सूक्ष्म और सकीणं स्थाव तक मैं पहुँच चुका हूँ।
Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)
कबीर दोहावली
मूल श्लोकः
जहाँ न चींटी चढ़ि सकै, राई ना ठहराइ। मन पवन का गमि नहीं, वहाँ पहुॅचे जाइ॥
Kabir 14.8
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Translations & commentaries(2)
Sūtra — Translation
Bhāṣya — Commentary
―जिस ब्रह्म के पास तक चोटो, वायु और मन की गति भी नहीं है वहाँ तक कबीर पहुँच गए हैं।