―भक्त कबीर का तो वास्तविक घर ब्रह्मरंधू रूपी शिखर पर स्थिति है और वहाँ का मार्ग नाना प्रकार की बाधाओ के कीचड से परिपूर्ण है। वहाँ पर चीटी जैसा छोटा जीव भी अपने पैर रखकर नहीं जा सकता फिर और मनुष्य तो नाना प्रकार के सासारिक कुकर्मों का बोझ लादे हुए हैं कैसे वहाँ पहुँच सकते हैं।
Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)
कबीर दोहावली
मूल श्लोकः
जन कबीर का सिषर घर, बाट सलैली सैल। पाँव न टिकै पपीलिका, लोगनि लादे बैल॥
Kabir 14.7
Audio
Translations & commentaries(3)
Sūtra — Translation
Bhāṣya — Commentary
―भक्त कबीर के घर तक पुण्यात्मा और सज्जनो के पैर तो जम नही पाते, फिर पापियो का तो प्रश्न ही नहीं उठता।
Padārtha — Word-meaning
―सिषर=शून्य शिखर। सलैली सैल=कीचड़ आदि से दुर्गम पर्वतीय मार्ग। पपोलिका=पिपीलिका=चीटी।