―कवीर दास जो कहते हैं कि परमात्मा के पास तक पहुँचने का मार्ग अत्यधिक कठिन है वहाँ कोई आसानी से पहुँच नहीं सकता है। और जो वहाँ कठिन साधना करके पहुँच भी गये तो वे आवागमन से मुक्त होकर वहाँ से वापस आए हो नहीं फिर वहाँ के कुशल समाचार कौन आकर कहे।
Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)
कबीर दोहावली
मूल श्लोकः
कबीर मारिग कठिन है, कोई न सकई जाय। गये ते बहुड़ नहीं, कूसल कहै को आय॥
Kabir 14.6
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Translations & commentaries(3)
Sūtra — Translation
Bhāṣya — Commentary
―ब्रह्म के पास पहुँच कर कोई लौटना नहीं फिर वहाँ के समाचार कैसे मालूम हो?
Padārtha — Word-meaning
―बहुरे=लौटे।