―इस संसार के सभी प्रारणी ब्रह्म के पास जाने की बात तो करते हैं किन्तु इस बात मे सदेह है कि क्या वे वास्तव मे वहाँ तक पहुँच भी सकेंगे क्योकि ब्रह्म से उनका परिचय तो है नही फिर ये सब कहाँ जाकर रहेंगे?
Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)
कबीर दोहावली
मूल श्लोकः
चलौ चलौ सब कोइ कहै, मोहिं अंदेसा और। साहिब सूँ परचा नहीं, ए जाहिंगे किस ठौर॥
Kabir 14.4
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Translations & commentaries(3)
Sūtra — Translation
Bhāṣya — Commentary
―ब्रह्म से बिना परिचय हुए यदि जीव वहाँ तक जाए भी तो रहे कहाँ?
Padārtha — Word-meaning
―पर्चा=परिचय।