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Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)

कबीर दोहावली

मूल श्लोकः

उतीथै कोइ न आवई, जाकूँ बूॅझौं धाइ। इतथै सबै पठाइये, भार लदा लदाइ॥

Kabir 14.2

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Translations & commentaries(2)

Sūtra Translation

Sūtrahi.wikisource· HI

―कबीर दास जी कहते हैं कि ब्रह्म के पास पहुँच कर कोई वहाँ से लौटता नही है जिससे जाकर मैं पूछ सकूँ कि ब्रह्म के पास जाने का कौन सा मार्ग है? क्या तरीका है? इस संसार से हो कुकर्मों का बोझा लाद-लाद कर सभी प्राणी जाते हैं। शव्दार्थ―उती थैं=उधर से। इतीथै=इधर से।

Bhāṣya Commentary

Bhāṣyahi.wikisource· HI

―ब्रह्म के पास जीव जाकर लौट नही पाता है।