―जिस स्थान तक पहुँचने के लिए देवता, मनुष्य और मुनि सभी थक जाते हैं और थकावट के कारण वहाँ तक पहुँच नहीं पाते हैं। वहीं पर सौभाग्यवश कवीर दास पहुँच भी गए हैं और उनका स्थायी निवास भी हो गया है।
Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)
कबीर दोहावली
मूल श्लोकः
सुर नर था के मुनि जनाँ, जहाँ न कोइ जाइ। मोटे भाग कबीर के, तहाँ रहे घर छाइ॥१०॥
Kabir 14.10
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Translations & commentaries(3)
Sūtra — Translation
Bhāṣya — Commentary
―साधक की साधना की चरमावस्था ब्रह्म प्राप्ति है।
Padārtha — Word-meaning
―मोटे भाग=बड़े भाग्य।