कबीरदास जी कहते हैं कि सुन्दर शरीर को पाकर-देखकर उस पर गर्व नहीं करना चाहिए क्योंकि जिस प्रकार सर्प केचुली को छोड़ने के बाद पुनः उसे नहीं धारण करता है उसी प्रकार आत्मा भी इस शरीर को छोड़ देने के बाद फिर उसमें नहीं प्रविष्ट होती है।
Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)
कबीर दोहावली
मूल श्लोकः
संदर्भ―क्षरण भंगुर जीवन में अभिमान नहीं करना चाहिए। कबीर कहा गरबियौ, देही देखि सुरंग। बछड़ियाँ मिलिबौ नहीं, ज्यूँ कांचली भुवंग॥
Kabir 12.9
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Translations & commentaries(2)
Sūtra — Translation
Padārtha — Word-meaning
सुरंग = सुन्दर। वीछड़िया = वियुक्त होने पर।