―कवीरदास जी कहते हैं कि इस नश्वर शरीर और जीवन की आशा मे मनुष्य को घमण्ड करना चाहिए। जिस प्रकार पलाश के वृक्ष मे चार दिन के लिए अर्थात् थोड़े समय के लिए टेसू (पलाश के फूल) आ जाते हैं वह हराभरा हो जाता है और फिर वह ठूंठ का ठूंठ ही रह जाता है। ठीक उसी प्रकार यह जीवन भी थोड़े दिनों तक आभा बिखेर कर नष्ट हो जाता है।
Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)
कबीर दोहावली
मूल श्लोकः
संदर्भ―साग रूपक के द्वारा शरीर पर यमराज के आक्रमरण को स्पष्ट किया गया है। कबीर कहा गरबियों, इस जीवन की आस। टेसू फूले दिवस चारि, खंखर अये पलास॥
Kabir 12.8
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Translations & commentaries(2)
Sūtra — Translation
Padārtha — Word-meaning
खंखर = नष्ट हो जाते हैं।