―कबीर दास जो कहते है कि जीवन रूपी नाव अत्यन्त जजंर है जोर उसका खेने वाला नाविक अत्यन्त कूडा है,बेकार है। ऐमी अवस्था मे जो व्यक्ति हल्के है जिनके ऊपर पापो का वोझा कम है वे तो संसार सागर से पार उतर गए और जिनके सर पर पापो का वोझा लदा हुआ था ये उसी भव सागर मे ढ़ूब गए।
Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)
कबीर दोहावली
मूल श्लोकः
कबीर नाव जरजरी,कूडे खेवणहार। हलके हलके तिरि गए,बूडे तिनि सिर भार॥
Kabir 12.61
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Translations & commentaries(3)
Sūtra — Translation
Bhāṣya — Commentary
―जो पापो के वोझ से लदे नही होते है है वे ही संसार सागर को पार कर पाते है।
Padārtha — Word-meaning
―कूडे=रदी,बेकार। हलके हलके=शुद्धात्मा वाले।