―एक दिन ऐसा अवश्य आयेगा जब कि मनुष्य का सभी से वियोग हो जायेगा। अतएव हे राजाओ। हे छत्र को धारण करने वालो। आप लोग आज ही सावधान क्यो नही हो जाते। ताकि बाद मे पश्चाताप न करना पडे।
Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)
कबीर दोहावली
मूल श्लोकः
संदर्भ―मनुष्य जीवन को सुखमय बनाने के लिए नानावि प्रयास करता है और वे सुख के सघन पूर्ण भी नही हो पाते कि विनाश हो जाता है। इक दिन ऐसा होइगा, सब सूँ पड़ै विछोह। राजा राणा छत्रपति, सावधान किन होइ॥
Kabir 12.6
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Translations & commentaries(3)
Sūtra — Translation
Bhāṣya — Commentary
―संसार से वियोग अवश्यंभावी है इसलिए पहले ही व्यक्ति को सावधान हो जाना चाहिए।
Padārtha — Word-meaning
―किन=क्यो नही।