―अहंकार बहुत ही भयानक वस्तु है|इसका शीघ्र ही विनाश कर देना चाहिए अन्यथा यह व्यक्ति को ही नष्ट कर देगा। जिस प्रकार रूईमे लिपटी हुई अग्नि कब तक सुरक्षित रह सकती है वह थोडे ही समय मे रूई को भस्मकर बाहर प्रकट हो जाती है उसी प्रकार अहंकार भी कब तक छिपा हुआ रहेगा एक न एक दिन वह प्रकट होवेगा ही।
Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)
कबीर दोहावली
मूल श्लोकः
मैं मैं बड़ी बलाइ है, सकै जो निकसी भाजि। कब लग राखौं हे सखी, रुई पलेटी आगि॥
Kabir 12.59
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Translations & commentaries(3)
Sūtra — Translation
Bhāṣya — Commentary
―अहंकार किमी न किसी दिन प्रकट होकर जीव को नष्ट कर देता है।
Padārtha — Word-meaning
―मै मै=अह। वलाई=वला।