―हे जीवात्मा! तू खूब मन लगाकर सतकर्मों का पतला सूत कात जिससे तुझे अच्छी कीमत प्राप्त होगी। उस कर्म रूपी सूत को लेने वाले केवल राम ही हैं अन्य लोग तो पास आने का साहस भी करते हैं। शव्दार्थ―नान्हां=पतला। सूत=धागा कामं से तात्पर्य है। नेड़ा=समीप।
Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)
कबीर दोहावली
मूल श्लोकः
नाँन्हाँ काती चित दे महँगे मोलि बिकाइ। गाहक राजा राम है और न नेड़ा आइ॥
Kabir 12.57
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Translations & commentaries(2)
Sūtra — Translation
Bhāṣya — Commentary
―कर्मों के अनुसार फल देना परमात्मा का ही काम है।