जीवात्मा का घर तो ब्रह्म के पास ही है यह संसार तो उसके लिए परदेश है। लोग इस संसार मे कर्मों का व्यापार करने के लिए आते हैं और कर्मों का किराना―कर्म फल प्राप्त करके बेचकर सब उसी मार्ग का अवलम्बन करते हैं।
Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)
कबीर दोहावली
मूल श्लोकः
संदर्भ―इस संसार में सभी प्राणी अचानक मिल जाते है और फिर विमुक्त हो जाते हैं। इत प्रधर, उत घर, बण जण आये हाट। करम किरांणां बेचि करि, उठि ज लागे बाट॥
Kabir 12.56
Audio
Translations & commentaries(3)
Sūtra — Translation
Bhāṣya — Commentary
―इस ससार मे आकर लोग कर्मों का फल भोग कर फिर मृत्यु को प्राप्त हो जाते हैं।
Padārtha — Word-meaning
―प्रघर=पर घर, संसार। बर=ब्रह्म।