बिड़ाणी=नष्ट होने वाली है।
Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)
कबीर दोहावली
मूल श्लोकः
सौंदर्भ―बिना ईश्वर को प्रतीति के जीवात्मा को मुक्ति नहीं मिलती। माँइ बिड़ाणी वाप बिड़, हम भी मॅझि बिड़ोह। दरिया केरी नाव ज्यूॅ, सजोगे मिलियाँह॥
Kabir 12.55
कबीर दोहावली
मूल श्लोकः
सौंदर्भ―बिना ईश्वर को प्रतीति के जीवात्मा को मुक्ति नहीं मिलती। माँइ बिड़ाणी वाप बिड़, हम भी मॅझि बिड़ोह। दरिया केरी नाव ज्यूॅ, सजोगे मिलियाँह॥
Kabir 12.55
बिड़ाणी=नष्ट होने वाली है।